सरल anubhati सिद्ध तांत्रिक prayog- (saral anubhati sidh tantric prayog)
दहजमी से मुक्ति हेतु : बदहजमी होने अथवा पेट में अफारा आने पर तुलसी के सात पत्ते रोगी को खिलाएं। ध्यान रहे, इन पत्तों को चबाएं नहीं।
नेत्र पीड़ा से रक्षा के लिए : आंखों की बीमारी में मुक्ति हेतु सूर्य की उपासना करें। साथ ही सुबह उठकर सूर्यमुखी का फूल सूंघें तथा शुद्ध गुलाब जल आंखों में डालें। सूर्य नमन लाभकारी पाये गये हैं। अतः इस रोग में व्यक्ति को प्रातःकाल उठ कर सूर्यमुखी का फूल सूूंघना चाहिए तथा शुद्ध गुलाब जल आंखों में डालना चाहिए।
स्वास्थ्य को अनुकूल रखने के लिए : पारद शिव लिंग का दूध से अभिषेक कर पूजा उपासना करें। यह क्रिया श्रावण मास के प्रथम सोमवार से शुरू करें और नियमित रूप से करते रहें, असाध्य से असाय रोगों से मुक्ति मिलेगी।
सिर दर्द से मुक्ति हेतु : शनिवार एवं मंगलरवार को नियमित रूप से हनुमान जी के चरणों के सिंदूर का तिलक करें, सिर दर्द से मुक्ति मिलेगी।
पीलिया से बचाव के लिए : पीलिया एक खतरनाक बीमारी है। इससे मुक्ति और बचाव के लिए गुरुवार को सूर्योदय या सूर्यास्त के समय पुनर्नवा की जड़ गले में धारण करें।
जीवन में सफलता हेतु : लकड़ी की डिब्बी में पीला सिंदूर रखकर उसमें गोमती चक्र रखें, घर में धन का आगमन होगा और जीवन सफल होगा।
कार्य में सफलता के लिए : किसी उच्च अधिकारी से कार्य करवाना हो या कोर्ट कचहरी में कार्य हेतु जाना हो तो गुंजा की जड़ जेब में रखकर जाएं, सफलता मिलेगी।
वशीकरण के लिए : गुंजा को चंदन की भांति मस्तक पर लगाकर जाएं, दुश्मन भी आपको देखेगा तो वशीभूत हो जाएगा। भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति हेतु : ५ रत्ती गुंजा शरीर पर बांधें, भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलेगी।
हृदय रोग से मुक्ति के लिए : हृदय रोग में सोमवार को पांचमुखी असली रुद्राक्ष काले डोरे में पहनें। सूर्य भगवान को प्रतिदिन जल चढ़ाएं तथा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ नियमित रूप से करें। जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका हो, वे सात साबुत लाल मिर्च और एक लाल हकीक लाल कपड़े के एक टुकड़े में बांध कर अपने ऊपर से इक्कीस बार वार कर बहते पानी में बहा दें, लाभ होगा।
परदेश गए व्यक्ति की वापसी हेतुः प्रातः स्नान करने के बाद परदेश गए व्यक्ति का नाम कागज पर लिखकर रख लें। फिर आटे का एक दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेल डालकर उसे जलाएं। फिर जमीन पर नमक रखें और उस पर दीपक रखकर उस व्यक्ति का ध्यान कर ग्यारह बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह क्रिया 43 दिनों तक नियमित रूप से करें, व्यक्ति वापस आ जाएगा।
दिए गए धन की वापसी हेतु : ऊपर वर्णित विधि की तरह आटे का दीपक जलाएं तथा जिसे पैसे दिए हों, उस व्यक्ति का ध्यान कर ग्यारह बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह क्रिया 43 दिन तक लगातार नियमित रूप से करते रहें, दिए हुए पैसे वापस मिल जाएंगे।
एकाग्रता हेतु : नित्य मां के चरण स्पर्श करें और क्क सोम सोमाय नमः का जप करें।
परिश्रम के अनुरूप अंक प्राप्ति हेतु : किसी योग्य ज्योतिर्विद के परामर्श के अनुरूप लग्नेश या पंचमेश का रत्न या उपरत्न धारण करें।
स्मरण शक्ति को सुदृढ़ करने हेतु : पन्ना धारण करें और क्क ऐं सरस्वत्यै नमः का जप करें।
अच्छे अंक की प्राप्ति हेतु : लग्न (लक्ष्य), सूर्य (मनोबल) और चंद्र (मन) अनुकूल हों, तो छात्र को अच्छे अंक प्राप्त होते हैं। आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए पिता के चरण स्पर्श करें और सूर्य को अर्य दें। पढ़ाई पर अधिक ध्यान दें, किंतु साथ ही थोड़ा समय खेल, परिवार और मित्रों के लिए भी निकालें। प्रसन्नचित्त रहें और शाकाहारी तथा पौष्टिक भोजन लें।
मन की चंचलता दूर करने हेतु : लौंग को अपने ऊपर से ७ बार उतार कर बाहरी सड़क पर फेंक दें, मन की चंचलता दूर और निर्णय क्षमता सुदृढ़ होगी।
शिक्षा संबंधी किसी भी कष्ट से मुक्ति हेतु : गणेश को प्रतिदिन ३ से ५ पत्तियों वाली दूर्वा चढ़ाएं और उनके द्वादश नामों का पाठ करें। इससे मन शांत तथा अनुकूल रहेगा और शिक्षा में आने वाली रुकावटें दूर होंगी।
सांप के विष से बचाव हेतु : चैत्र मास की मेष संक्राति के दिन मसूर की दाल एवं नीम की पत्तियां खाएं। सर्प काट भी लेगा तो विष नहीं चढ़ेगा। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन प्रातः काल नीम की पत्तियां चबाकर पानी पीएं और घूमने जाएं, शरीर में विष रोधी क्षमता बढ़ेगी।
घर में स्थिर लक्ष्मी के वास के लिए : चक्की पर गेहूं पिसवाने जाते समय तुलसी के ग्यारह पत्ते गेहूं में डाल दें। एक लाल थैली में केसर के २ पत्ते और थोड़े से गेहूं डालकर मंदिर में रखकर फिर इन्हें भी पिसवाने वाले गेंहू में मिला दें, धन में बरकत होगी और घर में स्थ्रि लक्ष्मी का वास होगा। आटा केवल सोमवार या शनिवार को पिसवाएं।
पति-पत्नी के बीच वैमनस्यता को दूर करने हेतु : रात को सोते समय पत्नी पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति पत्नी के तकिये में कपूर की २ टिकियां रख दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर उस कमरे जला दें।
पैतृक संपत्ति की प्राप्ति के लिए : घर में पूर्वजों के गड़े हुए धन की प्राप्ति हेतु किसी सोमवार को २१ श्वेत चितकवरी कौड़ियों को अच्छी तरह पीस लें और चूर्ण को उस स्थान पर रखें, जहां धन गड़े होने का अनुमान हो। धन गड़ा हुआ होगा, तो मिल जाएगा।
सगे संबंधियों को दिया गया धन वापस प्राप्त करने हेतु : किसी सगे संबंधी को धन दिया हो और वह वापस नहीं कर रहा हो, तो ऊपर बताई गई विधि की भांति २१ श्वेत चितकबरी कौड़ियों को पीस कर चूर्ण उसके दरबाजे के आगे बिखेर दें। यह क्रिया ४३ दिनों तक करते रहें, वह व्यक्ति आपका धन वापस कर देगा।
बुखार से मुक्ति हेतु : शनि या रविवार को चावल के सात दाने लेकर घर से बिना बोले किसी आक के पेड़+ के पास जाकर पूरब की ओर मुख खड़े हो जाएं और हे ज्वर, आपको शनिवार का निमंत्रण है कहते हुए चावल का एक दाना आक की जड़ में रख दें, बिना बुलाए मत आना, दूसरा चावल रखकर कहें कि ज्वर देव आपको सोमवार का निमंत्रण है, किंतु बिना नहीं आना। यह क्रिया सप्ताह के सभी दिनों का नाम लेकर करें, बुखार से मुक्ति मिल जाएगी।
आधासीसी के दर्द से मुक्ति हेतु : सूर्य निकलने से पूर्व घर से गुड़ की एक डली लेकर निकलें। किसी चौराहे पर आकर पश्चिम की ओर मुख करके खड़े हों तथा गुड़ की आधी डली को मुंह से कई टुकड़े करके वहीं फेंक दें और घर आ जाएं, सिर का दर्द समाप्त हो जाएगा।
नजर दोष से मुक्ति हेतु कुछ विशेष उपाय :
गाय के गोबर का चौमुखी दीप बनाकर उसमें तिल के तेल की बत्ती जला दें और थोड़ा गुड़ डाल दें। फिर उसे घर के मुख्य द्वार पर रख दें, बच्चे की नजर दोष से रक्षा होगी।
गेहूं के आटे से दीया बनाएं और उसमें काले धागे की बत्ती जलाएं। उस ज्योति में दो लाल मिर्च रखें और उसे नजर लगे व्यक्ति पर से उतारें, नजर दोष दूर होगा।
रविवार या शनिवार को नजर लगे व्यक्ति के सिर पर से तीन बार दूध फेरकर कुत्ते को दें, नजर दोष से मुक्ति मिलेगी।
ज्वार की रोटी एक तरफ से ही सेंकें। सेंके हुए भाग पर घी लगाकर रोटी को पीले धागे से बांधें। फिर उसे नजर लगे व्यक्ति के ऊपर से ७ बार उतारकर कुत्ते को दे दें, नजर दोष दूर होगा।
अठारा रोग से बचाव के लिए : किसी कन्या के हाथ का कता सूत लेकर उसका एक हाथ लंबा धागा बना लें तथा रविवार को अठारा रोग से ग्रस्त रोगी की दाहिनी पिंडली में बांध दें। रोगी ठीक हो जाएगा।
पुत्र प्राप्ति हेतु : रविपुष्य योग में शेर और बिल्ली का नाखून लेकर एक साथ मढ़ा कर दायें बाजू पर बांध लें, पुत्र की प्राप्ति होगी।
कार्य में आने वाली रुकावटों से मुक्ति हेतु : शनिवार को एक पात्र में कच्ची घानी का सरसों तेल लेकर उसमें अपनी छाया देखें। फिर उसमें गुड़ के गुलगुले डालें और उसे किसी गरीब को दे दें, बाधाओं मुक्ति मिलेगी और शनि कोप से बचाव होगा।
कार्य में सफलता हेतु : किसी कार्य विशेष के लिए जाने से पहले एक बेदाग नीबू को गाय के गोबर में दबा कर उस पर कामिया सिंदूर छिड़क दें। फिर अपने कार्य की सफलता की प्रार्थना कर प्रस्थान करें, सफलता मिलेगी।
सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए : नवविवाहिता वधू की विदाई के समय एक लोटा गंगाजल में हल्दी और एक पीला सिक्का डालकर वधू के सिर से उतार लें और फिर उसके आगे फेंक दें। यह क्रिया पूरी निष्ठा के साथ करें, वधू का वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।
बच्चे के दांत निकलने में कष्ट से मुक्ति हेतु : बच्चे को दांत निकलते समय दर्द होता हो, तो उसके गले में रोहू मछली के पांच दांत धागे में बांधकर लटका दें। बच्चे को दर्द से राहत मिलेगी।
परीक्षा में सफलता हेतु : परीक्षा में सफलता हेतु गणेश रुद्राक्ष धारण करें। बुधवार को गणेश जी के मंदिर में जाकर दर्शन करें और मूंग के लड्डुओं का भोग लगाकर सफलता की प्रार्थना करें।
पदोन्नति हेतु : शुक्ल पक्ष के सोमवार को सिद्ध योग में तीन गोमती चक्र चांदी के तार में एक साथ बांधें और उन्हें हर समय अपने साथ रखें, पदोन्नति के साथ-साथ व्यवसाय में भी लाभ होगा।
मुकदमे में विजय हेतु : पांच गोमती चक्र जेब में रखकर कोर्ट में जाया करें, मुकदमे में निर्णय आपके पक्ष में होगा।
पढ़ाई में एकाग्रता हेतु : शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को इमली के २२ पत्ते ले आएं और उनमें से ११ पत्ते सूर्य देव को ¬ सूर्याय नमः कहते हुए अर्पित करें। शेष ११ पत्तों को अपनी किताबों में रख लें, पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी।
कार्य में सफलता के लिए : अमावस्या के दिन पीले कपड़े का त्रिकोना झंडा बना कर विष्णु भगवान के मंदिर के ऊपर लगवा दें, कार्य सिद्ध होगा।
गृह कलह से मुक्ति हेतु : परिवार में पैसे की वजह से कलह रहता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख में पांच कौड़ियां रखकर उसे चावल से भरी चांदी की कटोरी पर घर में स्थापित करें। यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को या दीपावली के अवसर पर करें, लाभ अवश्य होगा।
क्रोध पर नियंत्रण हेतु : यदि घर के किसी व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख को साफ कर उसमें जल भरकर उसे पिला दें। यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण आपस में तनाव रहता हो, तो पूर्णिमा के दिन कदंब वृक्ष की सात अखंड पत्तों वाली डाली लाकर घर में रखें। अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली कदंब वृक्ष के पास छोड़ आएं और नई डाली लाकर रखें। यह क्रिया इसी तरह करते रहें, तनाव कम होगा।
मकान खाली कराने हेतु : शनिवार की शाम को भोजपत्र पर लाल चंदन से किरायेदार का नाम लिखकर शहद में डुबो दें। संभव हो, तो यह क्रिया शनिश्चरी अमावस्या को करें। कुछ ही दिनों में किरायेदार घर खाली कर देगा। ध्यान रहे, यह क्रिया करते समय कोई टोके नहीं।
बिक्री बढ़ाने हेतु : ग्यारह गोमती चक्र और तीन लघु नारियलों की यथाविधि पूजा कर उन्हें पीले वस्त्र में बांधकर बुधवार या शुक्रवार को अपने दरवाजे पर लटकाएं तथा हर पूर्णिमा को धूप दीप जलाएं। यह क्रिया निष्ठापूर्वक नियमित रूप से करें, ग्राहकों की संख्या में वृद्धि होगी और बिक्री बढ़ेगी।
शुक्रिया
भवदीया
मोहित शाह .
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