Sunday, 12 August 2012


ज्योतिष योग बताते हें की आप प्रशासनिक अधिकारी/कलक्टर/ADM /तहसीलदार कब बनेंगे..???

1. उच्च शिक्षा के योग——
आई. . एस. जैसे उच्च पद की प्राप्ति के लिये व्यक्ति की कुण्डली में शिक्षा का स्तर अच्छा होना चाहिए. शिक्षा के लिये शिक्षा के भाव दूसरा, चतुर्थ भाव, पंचम भाव नवम भाव को देखा जाता है. इन भाव/भावेशों के बली होने पर व्यक्ति की शिक्षा उतम मानी जाती है. शिक्षा से जुडे ग्रह है बुध, गुरु मंगल इसके अतिरिक्त शिक्षा को विशिष्ट बनाने वाले योग भी व्यक्ति की सफलता का मार्ग खोलते है. शिक्षा के अच्छे होने से व्यक्ति नौकरी की परीक्षा में बैठने के लिये योग्यता आती है.
2. आवश्यक भाव: छठा, पहला दशम घर——
किसी भी प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा में सफलता के लिये लग्न, षष्टम, तथा दशम भावो/ भावेशों का शक्तिशाली होना तथा इनमे पारस्परिक संबन्ध होना आवश्यक है. ये भाव/ भावेश जितने समर्थ होगें और उनमें पारस्परिक सम्बन्ध जितने गहरे होगें उतनी ही उंचाई तक व्यक्ति अपनी नौकरी में जा सकेगा.
इसके अतिरिक्त सफलता के लिये पूरी तौर से समर्पण तथा एकाग्र मेहनत की आवश्यकता होती है. इन सब गुणौ का बोध तीसरा घर कराता है. जिससे पराक्रम के घर के नाम से जाना जाता है. तीसरा भाव इसलिये भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योकी यह दशम घर से छठा घर है. इस घर से व्यवसाय के शत्रु देखे जाते है.
इसके बली होने से व्यक्ति में व्यवसाय के शत्रुओं से लडने की क्षमता आती है. यह घर उर्जा देता है. जिससे सफलता की उंचाईयों को छूना संभव हो पाता है.
3. आवश्यक ग्रह ——
कुण्डली के सभी ग्रहों में सूर्य को राजा की उपाधि दी गई है. तथा गुरु को ज्ञान का कारक कहा गया है. ये दो ग्रह मुख्य रुप से प्रशासनिक प्रतियोगिताओं में सफलता और उच्च पद प्राप्ति मे सहायक ग्रह माना जाता है. एसे अधिकारियों के लिये जिनका कार्य मुख्य रुप से जनता की सेवा करना है.
उनके लिये शनि का महत्व अधिक हो जाता है. क्योकि शनि जनता प्रशासनिक अधिकारियों के बीच के सेतू है. कई प्रशासनिक अधिकारी नौकरी करते समय भी लेखन को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने में सफल हुए है. यह मंगल बुध की कृपा के बिना संभव नहीं है. मंगल को स्याही बुध को कलम कहा जाता है.
प्रशासनिक अधिकारी मे चयन के लिये सूर्य, गुरु, मंगल, राहु चन्द्र आदि ग्रह बलिष्ठ होने चाहिए. मंगल से व्यक्ति में साहस, पराक्रम जोश आता है. जो प्रतियोगीताओं में सफलता की प्राप्ति के लिये अत्यन्त आवश्यक है.
4. अमात्यकारक ग्रह की भूमिका —–
प्रशासनिक अधिकारी के पद की प्राप्ति के लिये अमात्यकारक ग्रह बडी भूमिका निभाता है. अगर किसी कुण्डली में अमात्यकारक बली है. (स्वग्रही, उच्च के, वर्गोतम) आदि स्थिति में हों. तथा केन्द्र में है. इसके अतिरिक्त बलशाली अमात्यकारक तीसरे एकादश घरों में होने पर व्यक्ति को अपने जीवन काल में काफी उंचाई तक जाने का मौका मिलता है.
इस स्थिति में व्यक्ति को एसे काम करने के अवसर मिलते है. जिनमें वह आनन्द का अनुभव कर पाता है. अमात्यकारक नवाशं में आत्मकारक से केन्द्र अथवा तीसरे या एकादश भाव में हो तो व्यक्ति को सुन्दर बाधा रहित नौकरी मिलती है. इसलिये अमात्यकारक की नवाशं में स्थिति भी देखी जाती है.
5. दशायें —–
व्यक्ति की कुण्डली में नौकरी में सफलता मिलने की संभावनाएं अधिक है. और दशा भी उन्ही ग्रहों से संबन्धित मिल जाये तो सफलता अवश्य मिलती है. व्यक्ति को आई..एस. बनने के लिये दशम, छठे, तीसरे लग्न भाव/भावेशों की दशा मिलनी अच्छी होगी.
6 अन्य योग—-
——- भाव एकादश का स्वामी नवम घर में हो या दशम भाव के स्वामी से युति या दृ्ष्ट हो तो व्यक्ति के प्रशासनिक अधिकारी बनने की संभावना बनती है.
—— पंचम भाव में उच्च का गुरु या शुक्र होने पर उसपर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तथा सूर्य भी अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति इन्ही ग्रहों की दशाओं में उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है.
——लग्नेश और दशमेश स्वग्रही या उच्च के होकर केन्द्र या त्रिकोण में हो और गुरु उच्च का या स्वग्रही हो तो भी व्यक्ति की प्रशासनिक अधिकारी बनने की प्रबल संभावना होती है.
—- –कुण्डली के केन्द्र में विशेषकर लग्न में सूर्य, और बुध हों और गुरु की शुभ दृ्ष्टि इन पर हो तो जातक प्रशासनिक सेवा में उच्च पद प्राप्त करने में सफल रहता है

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